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Sadshayari


सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये,
वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है

Suna ai aaj uski ankho me aasu aa gaye,
wo baccho ko sikha rahi thi ki muhhabat aise likhte hai.

वफ़ा का दरिया कभी रुकता नही,
 इश्क़ में प्रेमी कभी झुकता नही, 
खामोश हैं हम किसी के खुशी के लिए,
 ना सोचो के हमारा दिल दुःखता नहीं

काश यह जालिम जुदाई न होती!
ऐ खुदा तूने यह चीज़ बनायीं न होती!
न हम उनसे मिलते न प्यार होता!
ज़िन्दगी जो अपनी थी वो परायी न होती

जुल्म के सारे हुनर हम पर यूँ आजमाये गये,
जुल्म भी सहा हमने और जालिम भी कहलाये गये

तेरी तो फितरत थी सबसे मोहब्बत करने की,
हम तो बेवजह खुद को खुशनसीब समझने लगे

कुछ तो बात है मोहब्बत में,
वरना एक लाश के लिए
कोई ताजमहल नही बनवाता

तेरी दुनिया का ये दस्तूर भी
अजीब है ऐ खुदा,
मोहब्बत भी उनको मिलती है ,
जिन्हें करनी नही आती।

इतना ही गुरुर था तो मुकाबला इश्क का करती ऐ बेवफा,
हुस्न पर क्या ईतराना जिसकी ओकात ही बिस्तर तक हौ

कोई उम्मीद ना थी हमे उनसे मोहब्बत की,,
बस एक जिद थी के दिल टूटे तो उनके हाथों।

इतनी बेचैनी से मुझको किसकी तलाश है 
वो कौन है जो मेरी आंखों की प्यास है 

जिसकी वजह से मेंने छोड़ी अपनी साँस..
आज वो ही आके पूछती हे किसकी हे ये लाश।

ए नसीब ज़रा एक बात तो बता,
तू सबको आज़माता है,या मुझसे ही दुश्मनी है

इश्क भी हर किसी के बस का नहीं है,
साला  ‎जिगर चाहिए बर्बाद होने के लिए।

ऐ दिल तू क्यों रोता है,
ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है।

कांटो सी चुभती है तन्हाई
अंगारों सी सुलगती है तन्हाई
कोई आ कर हम दोनों को ज़रा हँसा दे
मैं रोता हूँ तो रोने लगती है तन्हाई।

नहीं मिला कोई तुम जैसा आज तक,
पर ये सितम अलग है की मिले तुम भी नही।


टूटे हुए प्याले में जाम नहीं आता
इश्क़ में मरीज को आराम नहीं आता
ये बेवफा दिल तोड़ने से पहले ये सोच तो लिया होता
के टुटा हुआ दिल किसी के काम नहीं आता ।

जब खुदा ने इश्क बनाया होगा,
तब उसने भी इसे आजमाया होगा..
हमारी औकात ही क्या है,
कमबख्त इश्क ने तो
खुदा को भी रुलाया होगा।

री ख़ुशी की खातिर मैंने कितने ग़म छिपाए 
अगर मैं हर बार रोता तो तेरा शहर डूब जाता।

उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है।

दिल में है जो दर्द वो दर्द किसे बताएं
हंसते हुए ये ज़ख्म किसे दिखाएँ
कहती है ये दुनिया हमे खुश नसीब
मगर इस नसीब की दास्ताँ किसे बताएं।

हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का,
बड़ी सादगी से कहते है मजबूर थे हम।

हमने तो एक ही शख्स पर चाहत ख़त्म कर दी
 अब मोहब्बत किसे कहते है मालूम नहीं।

ना ज़ख्म भरे,
ना शराब सहारा हुई..
ना वो वापस लौटीं,
ना मोहब्बत दोबारा हुई।